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भारत-चीन सीमा पर उत्तरकाशी का लाल शहीद, घर का इकलौता चिराग, दो माह पहले हुआ पिता का निधन

संवाददाता सुरेंद्र पाल सिंह (उत्तरकाशी)

 

उत्तरकाशी: भारत चीन सीमा पर नीति घाटी की गोल्डुंग पोस्ट में तैनात गढ़वाल स्काउट के राइफलमैन शैलेंद्र सिंह कठैत ड्यूटी के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। शैलेंद्र का पार्थिव शरीर बुधवार को गांव लाया जाएगा। जहां पैतृक घाट पर सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

 

शैलेंद्र (28) उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ के कुमराड़ा गांव का रहने वाला था। वह अपने घर का इकलौता चिराग था। उनकी दो छोटी बहनें हैं। जबकि, दो महीने पहले ही राइफलमैन शैलेंद्र के पिता कृपाल सिंह कठैत की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। शैलेंद्र की पांच और एक साल की दो छोटी बेटियां हैं। उनकी पत्नी अंजू और मां ध्यान देई का रो रोकर बुरा हाल है।

 

शैलेंद्र ने 2017 में सेना में भर्ती हुआ था। उन्होंने अपनी पहली पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में की थी। उसके बाद वह भारत चीन सीमा पर नीति घाटी में तैनात हुए। उन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान कई बार बर्फीली चोटियों पर पेट्रोलिंग की।

 

शैलेंद्र के मामा ओम प्रकाश ने बताया कि शैलेंद्र पेट्रोलिंग के लिए साथियों के साथ जा रहा था तो अचानक उसका पैर फिसल गया है। वह ग्लेशियर की पहाड़ी से गिर गया, जब तक उसको निकाला गया, तब शैलेंद्र का बलिदान हो चुका था।

शैलेंद्र के चाचा अतर सिंह कठैत ने बताया कि सैन्य अधिकारियों ने उन्हें बताया कि शैलेंद्र बर्फ की चपेट में आ गया था। जिसकी वजह से उनका निधन हो गया।

 

शैलेंद्र के बलिदान पर उनके गांव में शोक का माहौल है। उनके गांव के लोग उनके पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे हैं। उनके गांव के प्रधान राजेंद्र सिंह ने कहा कि शैलेंद्र ने अपने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। उनके बलिदान को गांव के लोग कभी नहीं भूलेंगे।uttarkashi

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