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uttarkashi news प्रताप संग्रहालय और तिबार उत्तरकाशी की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का नया प्रयास

संवाददाता ठाकुर सुरेंद्र पाल सिंह (उत्तरकाशी)

उत्तरकाशी: शहर में बैसाखी के पावन अवसर पर प्रताप संग्रहालय और तिबार का शुभारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने गढरत्न लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी जिन्होंने अपने कर कमलों से इस कार्यक्रम की शुरुआत की। संग्रहालय और तिबार के संरक्षक प्रताप सिंह बिष्ट संघर्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह संग्रहालय और तिबार हमारी भावी पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी को हमारी संस्कृति और विरासत से रूबरू कराने का एक माध्यम बनेगा।

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उन्होंने यह भी बताया कि इस संग्रहालय में हमारे पूर्वजों की विरासत को भी सजाया गया है, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा ले सकें। प्रताप सिंह बिष्ट ने यह भी कहा कि उनके मन में यह विचार 2010 से था और उन्होंने इस संग्रहालय और तिबार को बनाने में छह वर्ष का समय लगाया है। उनका उद्देश्य था कि उत्तरकाशी में पर्यटन को बढ़ावा मिले और लोग हमारी संस्कृति से परिचित हो सकें।

इस महत्वपूर्ण कार्य में उनके पुत्र जयदीप बिष्ट बहू गीता बिष्ट और पुत्री निलिमा ने उनका सहयोग किया। प्रताप सिंह बिष्ट ‘संघर्ष’ की इच्छा है कि यह संग्रहालय न केवल उत्तरकाशी का, बल्कि देश-विदेश के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बने।

समय की धारा में उमर धीरे-धीरे खिसकती चली जाएगी,
कर पाऊं कुछ विरासत इकट्ठी यादगार बनकर रह जाएगी।

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इस अनूठे प्रयास के माध्यम से प्रताप सिंह बिष्ट ‘संघर्ष’ ने उत्तरकाशी की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का एक सपना साकार किया है। उनका मानना है कि संग्रहालय और तिबार न केवल इतिहास के पन्नों को सहेजेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों से जोड़ने का भी काम करेंगे।

 

उन्होंने इस परियोजना को पूरा करने में अपने परिवार के साथ-साथ समुदाय के लोगों के अमूल्य सहयोग की भी सराहना की। उनका कहना है कि इस तरह के प्रयास से समाज में एकता और सामंजस्य की भावना मजबूत होती है।

प्रताप सिंह बिष्ट ‘संघर्ष’ की यह पहल न सिर्फ उत्तरकाशी के लिए, बल्कि पूरे उत्तराखंड राज्य के लिए एक मिसाल है। उनकी इस पहल से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे भी अपनी संस्कृति और विरासत को संजोने के लिए आगे आएंगे।

 

इस संग्रहालय और तिबार के खुलने से उत्तरकाशी के पर्यटन को नई दिशा मिलेगी और यह स्थान शिक्षा और ज्ञान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां आने वाले पर्यटक न केवल उत्तरकाशी की खूबसूरती का आनंद लेंगे, बल्कि यहां की संस्कृति और इतिहास से भी परिचित होंगे।

 

उत्तरकाशी के इस संग्रहालय और तिबार के खुलने से न सिर्फ शहर की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का एक नया माध्यम मिला है, बल्कि यह शहर अब पर्यटन के नए आयाम भी खोल रहा है। यहां आने वाले पर्यटक अब उत्तरकाशी की सुंदरता के साथ-साथ इसकी सांस्कृतिक धरोहर से भी रूबरू होंगे।

प्रताप सिंह बिष्ट ‘संघर्ष’ का यह प्रयास न सिर्फ उत्तरकाशी, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए एक आदर्श है। उनकी इस पहल से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे भी अपनी संस्कृति और विरासत को संजोने के लिए आगे आएंगे।

 

उन्होंने इस परियोजना को पूरा करने में अपने परिवार के साथ-साथ समुदाय के लोगों के अमूल्य सहयोग की भी सराहना की। उनका कहना है कि इस तरह के प्रयास से समाज में एकता और सामंजस्य की भावना मजबूत होती है।

 

प्रताप सिंह बिष्ट ‘संघर्ष’ की यह पहल न सिर्फ उत्तरकाशी के लिए, बल्कि पूरे उत्तराखंड राज्य के लिए एक मिसाल है। उनकी इस पहल से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे भी अपनी संस्कृति और विरासत को संजोने के लिए आगे आएंगे।

इस संग्रहालय और तिबार के खुलने से उत्तरकाशी के पर्यटन को नई दिशा मिलेगी और यह स्थान शिक्षा और ज्ञान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां आने वाले पर्यटक न केवल उत्तरकाशी की खूबसूरती का आनंद लेंगे, बल्कि यहां की संस्कृति और इतिहास से भी परिचित होंगे।

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