उत्‍तराखण्‍ड टिहरी गढ़वाल

टिहरी डूबण लग्यु चा बेटा डाम का खातिर

‘टिहरी डूबण लग्यु चा बेटा कार्यक्रम  में आए लोगों को भावुक किया

देहरादून।( पहाड़ की वाणी )वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक महिपाल सिंह नेगी के ‘टिहरी की जलसमाधि पुस्तक के विमोचन पर लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने ‘टिहरी डूबण लग्यु चा बेटा डाम का खातिर… गीत गाकर कार्यक्रम आए लोगों को भावुक कर दिया।

रविवार को प्रेस क्लब में किताब का विमोचन स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल, पूर्व आईएएस एसएस पांगती, लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, सामाजिक कार्यकर्ता धूम सिंह नेगी और प्रेस क्लब अध्यक्ष अजय राणा ने किया। कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल और लोकगायक नरेंद्र नेगी ने किताब की प्रशंसा की।

लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि महिपाल सिंह नेगी का लेखन लोकप्रिय रहा है, वह न केवल टिहरी बल्कि पूरे उत्तराखंड की समस्याओं से वाकिफ हैं, कार्यक्रम में जुटी भीड़ उनकी लोकप्रियता को दर्शाती है। किताब के लेखक महिपाल सिंह नेगी टिहरी के दुर्लभ दस्तावेजों और जानकारियों के बारे में बताया।

उन्होंने बताया कि यह किताब टिहरी के इतिहास, बांध परियोजना और उसके बाद के तमाम घटनाक्रमों को संजोती है। इस मौके पर प्रो. एसपी सती, प्रो. हर्ष डोभाल, टिहरी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष उमेशचरण गुसाईं, राजीव नयन बहुगुणा, शक्तिमोहन बिजल्वाण, मनमोहन रावत आदि मौजूद रहे।

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उत्‍तराखण्‍ड

भूस्खलन से आवासीय भवन को खतरा, प्रशासन से लगाई गुहार पौड़ी। लोनिवि के अफसरों की लापरवाही और जिद के चलते एक आवासीय भवन खतरे की जद में आ गया है। बारिश से सड़क के ऊपर वाले हिस्से से भूस्खलन होने के बाद भवन में दरारें पड़ गई हैं। वहीं भवन स्वामी ने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। कहा कि मोटर मार्ग कटिंग के दौरान ही उन्होंने यहां पर पुश्ता लगाने की मांग उठाई थी। लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पाबौ ब्लाक के अंतर्गत बालीकंडारस्यूं के पोखरी गांव निवासी कादंबरी देवी पत्नी स्व. मायाराम भट्ट ने जिला प्रशासन से उनके पैतृक घर को बचाने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि ढुमका- पोखरी मोटर मार्ग पर उनका आवासीय भवन है। बारिश के चलते भवन के आंगन का सारा हिस्सा टूट गया है। जिससे भवन भी खतरे की जद में आ गया है। कहा कि कई बार लोनिवि को सूचित करने के बाद भी उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। जिसके चलते अब भवन ध्वस्त होने की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि उनके पास एक मात्र ही रहने का ठिकाना है। यदि यह भवन भी भूस्खलन की चपेट में आ गया तो वे कहां जाएंगे। उन्होंने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।