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कांस्टेबल अमित राणा ने डेंगू पेशेंट को (एस.डी.पी) डोनेट कर दिया नया जीवन

संदीप बिष्ट
देहरादून। उत्तराखंड पुलिस को हमेशा से ही मित्र पुलिस के नाम से जाना जाता है। मित्र पुलिस के अर्थ को उत्तराखंड पुलिस के जवानों ने कई बार उत्कृष्ट मानवीय सेवाओं से साबित कर दिखाया है। थाना डालनवाला, देहरादून में तैनात कांस्टेबल अमित राणा ने मानवता का धर्म निभाते हुए एक बार फिर मित्र पुलिस का नाम रोशन कर दिया है।
कांस्टेबल अमित राणा मात्र एक फ़ोन कॉल पर देहरादून स्थित गोविंद अस्पताल में ऐडमिट डेंगू पेशेंट संजय रौथाण को (एस. डी. पी ) डोनेट करने पहुंचे जिनकी प्लेटलेट्स 8000 से काम हो चुकी थी और जीवन खतरे में था। उन्होंने 90 मिनट की रक्त जाँच में सफल होने के बाद डेंगू पेशेंट को रक्तदान के माध्यम से (एस डी पी ) डोनेट कर युवक के प्राणों की रक्षा की। वहीँ वरिष्ठ उप निरीक्षक प्रदीप नेगी को प्रेरणा स्रोत बताते हुए कहा की पुलिस की नौकरी के दौरान दिनभर के 24 घंटो में कई बार इमरजेंसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। इसलिए पुलिस का हर जवान ऐसी स्थितियों का सामना करने के लिए तत्पर रहता है। कहा की डेंगू जैसे बीमारी व्यक्ति को पूर्ण रूप से तोड़ देती है और अक्सर मृत्यु का कारण भी बन जाती है। इसलिए युवक के प्राणों की रक्षा के लिए अस्पताल पहुँच कर (एस.डी.पी ) डोनेट करना अति आवश्यक था। अभी तक 8 बार से अधिक बार आवश्यकता पड़ने पर रक्तदान कर चुके है और यह उनका पहला (एस डी पी ) डोनेशन था। साथ ही रक्तपुरष दलजीत सिंह को एक अच्छा मार्गदर्शक बताते हुए उनकी रक्तदान के प्रति दी जाने वाली आवाज़ को ईश्वर की आवाज़ बताया। बता दें की कुछ दिन पूर्व में भी मंहत इन्द्रेश हॉस्पिटल में ऐडमिट डेंगू पेशेंट युवक देव वर्मा को प्लेटलेट्स की आवश्यकता होने पर अमित राणा तुरंत (एस डी पी ) डोनेशन के लिए हॉस्पिटल पहुंचे जहाँ जाँच के बाद डॉक्टरों ने आवश्यकता पड़ने के बाद बुलाने की बात कही। वहीँ रक्तपुरष दलजीत सिंह ने मित्र पुलिस के जवानों को कर्तव्यनिष्ठ एवं अनुशासित रक्तदानी मानव सेवा भाव से दूसरों को नया जीवन उपहार में देने के लिए शुभकामनाएं दी तथा (एस.डी.पी) पर जानकारी दी की इस प्रकार के रक्तदान से एकत्र किए गए प्लेटलेट्स को सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) कहा जाता है।
जिसमे मशीन द्वारा रक्त से प्लेटलेट्स एक पाउच में एकत्र होती है जो पुनः टेस्ट करने के बाद मरीज को चढ़ाया जाता है वहीँ मशीन द्वारा फ़िल्टर के बाद का ब्लड डोनर के शरीर में पहुंचाया जाता है। साथ ही जानकारी दी की प्लेटलेट्स देने वाला व्यक्ति 72 घंटे बाद दोबारा प्लेटलेट्स दे सकता है। इसलिए उन्होंने डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए अधिक से अधिक जनमानस को आवश्यकता पड़ने पर आगे आकर सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) डोनेट करने की अपील की।
वहीँ एक अन्य मामले में जीआरपी लक्सर में तैनात उत्तराखंड पुलिस के कांस्टेबल संदीप चौधरी ने एम्स ऋषिकेश में भर्ती अल्मोड़ा की रहने वाली कैंसर पेशेंट महिला को ब्लड की आवश्यकता होने तथा कहीं से भी ब्लड की व्यवस्था नहीं होने पर तुरंत रक्तपुरष दलजीत सिंह से संपर्क साधा। जिसके परिणाम स्वरूप रक्तपुरष दलजीत सिंह की पहल पर कैंसर पेशेंट महिला के लिए एम्स ऋषिकेश में दूरभाष के माध्यम से तत्काल रक्त व्यवस्था हुई। महिला को रक्त मिलने पर पीड़ित परिवार ने उत्तराखंड मित्र पुलिस,आधारशिला रक्तदान समूह ग्रुप व दलजीत सिंह की भूरी भूरी प्रशंसा की। वरिष्ठ उप निरीक्षक प्रदीप नेगी ने पुलिस जवानों द्वारा मानव सेवा एवं रक्तदान के प्रति समर्पण भाव से मानव सेवा करने के लिए जवानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा की जवानो द्वारा की जा रही सेवा अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायक सिद्ध होगी।

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