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इसरो एवं रेडक्रास सोसायटी द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में 56 लोगों ने रक्तदान

संदीप बिष्ट
देहरादून। इसरो (भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान )‌ तथा जिला रेडक्रास सोसायटी , देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में कालीदास रोड स्थित आई आई आर एस के सभागार में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमेकुल 56 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। शिविर का उद्घाटन आई०आई०आर०एस० के निदेशक डॉ० आर.पी.सिंह , हैड परसोनल एंड जनरल एडमिनिस्ट्रेशन रथिन सेनगुप्ता, ग्रुप डायरेक्टर देबाशीष मित्रा, साइंटिस्ट एस एफ डॉ० दीपांविता हलधर , प्रशासनिक अधिकारी प्रसाद काडूरू , जिला रेडक्रास कमेटी के चेयरमैन डॉ० एम एस अंसारी, जिला सचिव कल्पना बिष्ट , यूथ रेडक्रास कमेटी के चेयरमैन रक्तदाता शिरोमणि अनिल वर्मा, प्रबंधन समिति सदस्यों योगेश अग्रवाल, विकास गुप्ता तथा मोहन खत्री , रेडक्रास सदस्या मेजर प्रेमलता वर्मा रूपाली शर्मा तथा वैशाली खरोला ने रिबन काटकर किया।
आई आई आर एस के निदेशक डॉ० आर पी सिंह ने कहा कि रक्तदान मानवता की पहचान है। प्रत्येक स्वस्थ नागरिक का यह सामाजिक दायित्व है कि वह रक्तदान करने के लिए स्वेच्छापूर्वक आगे आए। कहा की रक्तदान करके आप एक व्यक्ति का जीवन ही नहीं बचाते बल्कि उस व्यक्ति के पूरे परिवार की खुशियां लौटा देते हैं।
जिला रेडक्रास सोसायटी के चेयरमैन डॉ० एम एस अंसारी ने कहा कि रक्तदान समाज सेवा का सरल माध्यम है। एक बार रक्तदान करने से कम से कम तीन लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। पता नहीं कितने लोग वक्त पर रक्त न मिल पाने के कारण मौत का शिकार हो जाते हैं। हर व्यक्ति को सोचना चाहिए कि हम इंसानियत को जिंदा रखने में क्या योगदान कर सकते हैं। जिला सचिव रेडक्रास कल्पना बिष्ट ने कहा कि कोई भी स्वस्थ महिला या पुरुष रक्तदान कर सकता है। महिलाओं कै रक्तदान में पीछे नहीं रहना चाहिए। कहा की महिलाओं को हर छह महीने के पश्चात रक्तदान अवश्य करना चाहिए, वह स्वयं समय- समय पर रक्तदान करती रहती हैं। 150 से अधिक बार रक्तदान कर चुके यूथ रेडक्रास कमेटी के चेयरमैन अनिल वर्मा ने कहा कि रक्तदान करने से संबंधित अनेकों भ्रांतियाँ समाज में प्रचलित हैं। जिसकी वजह से लोग रक्तदान करने से बचते हैं। परन्तु सच्चाई यह है कि नियमित रूप से रक्तदान करने वाले रक्तदाता को स्वयं बहुत लाभ प्राप्त होता है। ऐसे लोगों का हाई ब्लड प्रेशर कोलेस्ट्रॉल , शुगर कंट्रोल में रहता है तथा बाॅडी फैट में कमी आती है। लगातार रक्तदान करने से रक्त में आयरन का लेवल सही बना रहने से 80 प्रतिशत हार्ट अटैक तथा 90 प्रतिशत कैंसर होने की संभावना कम हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त नियमित रक्तदान करने से नये ब्लड सेल्स बनते रहने से एंटी एजिंग का कार्य करता है। 129 बार रक्तदान कर चुके रेडक्रास मैनेजिंग कमेटी सदस्य योगेश अग्रवाल ने कहा की रक्त के लिए केवल मनुष्य के रक्त के सिवाय कोई विकल्प नहीं है। जिसमे अनेकों दुर्घटनाओं,प्रसव, सर्जरी , एनीमिया तथा थैलीसीमिया आदि रक्तरोगों के कारण ब्लड बैंकों में रक्त की आवश्यकता लगातार बनी रहती है। कहा की प्रत्येक स्वस्थ नागरिक अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझकर साल में दो बार भी स्वैच्छिक रक्तदान करे तो शायद ही किसी व्यक्ति रक्त के अभाव में मृत्यु हो।
जिला रेडक्रास सोसायटी की तरफ से समस्त रक्तदाताओं को प्रतीक चिन्ह व प्रमाण पत्र तथा दून हाॅस्पिटल ब्लड बैंक की ओर से रिफ्रेशमेंट प्रदान किया गया।
इस अवसर धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आई आई आर एस के पी० एंड ए०जी० रथिन सेनगुप्ता ने रेडक्रास के डाॅ० एम एस अंसारी, कल्पना बिष्ट, अनिल वर्मा, मेजर प्रेमलता वर्मा, योगेश अग्रवाल, विकास गुप्ता, रूपाली शर्मा, कु० वैशाली खरोला तथा दून ब्लड बैंक के डॉ० नितेश गुप्ता एवं डॉ० निवेदिता सजवाण का धन्यवाद करते हुए उपहार भेंटकर सम्मानित किया।
दून मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक की टीम में डा० नितेश गुप्ता, डॉ० निवेदिता सजवाण, काउंसलर अनिता सकलानी,, गणेश गोदियाल, अंकिता रावत, दीपक राणा,विजय नेगी तथा चंद्रमोहन बिष्ट ने शिविर संचालन में विशेष भूमिका निभाई।

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